Tuesday, 27 February, 2007

पहले हरियाणवी चिट्ठे का शुभारंभ

श्री गणेशाय नमः॥ ॥सरस्वत्यै नमः महर्षि अगस्त्य विजयते तुंगेश्वराय नमः जय बद्री विशाल जय बाबा केदारनाथ

राम राम भाईयो, पाठकां की डिमांड पै हाजिर सै हरियाणवी का पैहला चिट्ठा हरियाणवी चौपाल razz

इस चिट्ठे की कहाणी कुछ इसी सै के आपणे ई-पंडित चिट्ठे पै हरियाणवी मखौल पोस्ट करदा रहै करुं था तो एक दिन सागर भाईसाब बोल्ये अक हरियाणवी चिट्ठा शुरु कर द्‍यो। उनकी या बात मन्नै जंच गी, या बात एक जनवरी की सै। इब बोत दिनां तक तो नाम का चक्कर रह्‍या अक कै नाम रक्खूं। फेर ढीला सा पढ़ ग्या था पर सागर भाई बीच बीच म्ह याद दिलांदे रह्‍ये। इब या कोई इसी मीने की बात सै जद एक दिन आपणा स्टैट काऊंटर चैक करया था कि एक इन्कमिंग लिंक दिख्या। ले भई मैं हैरान मान ग्या। बंदा गूगल तै खोजदे होए पोहंच्या था haryana चुटकुला। मैं गूगल की आर्टीफिशयल इंटेलीजेंस नै बी मान ग्या अक एकदम सही जगां भेज्या बंदा। बस भाई मन्नै कह्‍या इब तो बणाणा ऐ पड़ागा हरियाणवी चिट्ठा। गेल्ली कल संजै भाई नै होर फूंक भर दी मेरी हरियाणवी की तारीफ करकै

इब दिक्कत या थी अक लिखूंगा कै इस चिट्ठे म्ह तो भाईसाब बोल्ये अक यो ए मखौल वगैरा लिख दियो होर कै।

फेर मन्नै निम्नलिखित बातां सोच कै चिट्ठा शुरु कर ई दिया।

» हरियाणे की इस माट्टी नै ई पाल पोस कै बड़ा करया, इसका अहसान चुकाण की एक कोशिश ई सही। होर कुछ नी तो कै बेरा कुछ होर लोग बी कदै मेरी देक्खा देक्खी हरियाणवी म्ह लिखणा शुरु कर दें। कम तै कम आपणी भाषा का प्रचार तो होवेगा।

» कोण सै डाक्टर नै कह रक्ख्या अक रोज लिखिए, आपणै निठल्ले भाईसाब जिस तरियां उत्तरांचल पै मीने म्ह दो तीन पोस्टां लिक्खै करां ओ ई तरीका आप्पां भी फिट करांगे। smile

» एक ब्लॉग लिखणां ई तो इसा काम सै जिस खातर दमाग की जरुरत कोनी, बस कुछ भी छाप द्‍यो। नारद माराज की किरपा तै लोग आ ई ज्यांगै। होर कुछ नी तो ठाकै हरियाणवी मखौल ई चेप दिया करांगे। lol

» के बेरा भाई आज तै ५-१० साल पीच्छा कुछेक हरियाणवी ब्लॉग हो ग्ये तो लोग मन्नै हरियाणवी का आदि चिट्ठाकार तो कहै करांगे। wink

उम्मीद सै भाईयों आदें रहोगे याड़ै मेरी बकबक सुणण खातर। mrgreen

20 टिप्पणियाँ:

Pankaj Bengani said...

घणो चोखो काम कर्यो रे मास्टर...

थारे कनै फाळतु रो बोळो टैम लागे है.. :)

कोई नहीं, मारा शुभाषिस . लिखतो रैजे बीरा.

मारै जीयाँ बन्द मति करीजै...

अभय तिवारी said...

भाई..
आज का दिन बड़ा अच्छा है..मोहल्ले में जनार्दन भैया की पाती की पुरबिया और अब आपकी हरयाणवी पढ़ के मन प्रसन्न हो गया.. लोक भाषा का स्वाद ही अलग है..बधाई हो.. और लिखते रहिये..

जगदीश भटिया said...

एक नयी शुरुआत के लिये बधाई।
अब यह सोचने वाली बात है कि यह हरियाणा का वैश्वीकरण है या विश्व का हरियावीकरण!

संजय बेंगाणी said...

हरीयाणी सिधो मुँह कोन्या बोले. बस वा ही पढ़णा में मज्जो आव.

भलो काम कर्यो स.

Manisha said...

घणी बधाई होवे।

मनीषा

hindibaat.blogspot.com

संजीत त्रिपाठी said...

ये हुई ना कोई बात मास्टर सा। लेकिन म्हारो नाम की ऐसी तैसी तो ना करो भाई…
जारी रखें

नितिन व्यास said...

स्वागत!!

Shrish said...

@Pankaj Bengani,
पंकज भाई आजकल बालकां कै पेपर चाल रये सैं जै करका टैम है थोड़ा, बस लाग रै सैं।
बन्द कोनी करदा जी, हाँ रेगुलर कोनी लिखण का।

@अभय तिवारी,
या बात तो थान्नै एकदम सई कही। हरयाणवी भाषा का स्वाद तो आपनै चखादां ई रहूंगा।

@जगदीश भाटिया,
शुक्रिया जगदीश भाई, बोत सई बात बोल्ली थामनै।

@संजय बेंगाणी,
थारी बात तो सई सै लेकिन लेकिन हरियाणवी की जबान पै ना जाओ उसका दिल बोत बड़ा हौवे सै।

@Manisha,
शुक्रिया जी, आगा बी पड्ड्ण आंदे रहियो।

@संजीत त्रिपाठी,
संजीत भाई, आप शायद संजै नाम की बात कर रये सैं, ओ तो मैं संजय भाई की बात कर रया था। संजय नै हरियाणवी म्ह संजै Pronounce करें सैं।

@नितिन व्यास,
शुक्रिया नितिन जी, उम्मीद सै बकबक पढण बी आंदै रहोगे।

yogesh samdarshi said...

धन्य है मुनिवर आप धन्य हैं

yogesh samdarshi said...

राम राम भाई. हम भी अडै बैठकै कुछ वार हुक्का गुडगुडा लेंगे. यो चुपाड तनै चौदक्खी जमा दी भाई. पर तीनां के आवण की राखिये मनाई. एक एबदार्, बदबूदान् अर अन्यायी. जडै ये जम आ जां सै उडै तो मटियामेट ही सै. कुछ गाणा बजाणा का भी इंतजाम राखिये भाई. अब वो टैम ना सैं अब तो आदमियां के बलैड भी छौरियां बेचा करै है. बधाई है म्हारी ओड तै बी.

yogesh samdarshi said...
This comment has been removed by a blog administrator.
सागर चन्द नाहर said...

दुनियाँ का पहला हिरियाणवी चिट्ठा शूरू करने की बहुत बहुत बधाई।
एक आदेश का पालन तो आपने बराबर किया अब मेरा दूसरा आदेश यह है कि जिस दिन आप हिन्दी- अंग्रेजी में पोस्ट करोगे उस दिन इस चौपाल में भी कुछ ना कुछ पोस्ट करना होगा।
बोलिये पालन करेंगे ना ?
ना ... ना.. मैं जानता हूँ आप कहना चाह रहे हो कि कोशिश करूंगा !
कोशिश नहीं करनी पोस्ट करनी है। :)

उडन तश्तरी said...

हे हरियाणवी के आदि चिट्ठाकार,

आपका इस शुभकार्य के लिये हार्दिक अभिनन्दन.

आप बहुतों के प्रेरणा स्त्रोत बनेंगे, यह तय है.

इस अनुपम शुरुआत के लिये लाख लाख बधाई। :)

Ajay said...

Bhai yo tai bhaut andy kaam kar diya sai tanne.
Ib likta bhi rahiye tawla tawla (jib bhi tanne tem milay).

Shrish said...

@yogesh samdarshi,
स्वागत सै योगेश भाई बात तो सई कहै रयै हो। गाणे बजाणे का बी इंतजाम देखांगे।

@सागर चन्द नाहर,
थाम नै बधाई जी, आगा कोशिश करूंगा ! :)

@उडन तश्तरी,
ल्यो जी इंतजार बी नी करणा पड़या थाम नै तो इब्बै बणै दिया मैं आदि चिट्ठाकार। :)

@Ajay,
अजै भाई कोशिश तो करुंगा ई, बाकी राम की मर्जी। अर मेरे यार अपणा नाम पता तो छोड़ ज्यंदा।

Abhishek said...

राम राम | आपके इस प्रयास को मैं बहुत सरहता हूँ | आशा करता हूँ की जल्द ही कुछ नया पढ़ने को मिलेगा |

अभिषेक
quillpad.in से हिंदी मैं लिखना, अब बहुत आसान

rajivtaneja said...

घणा चोखा काम करया रे तन्ने शिरीष भाई...

लग्या रह ईब सब खात्तर ...

म्हारी तरह से बोत बोत बधाई..

PRiTaM said...

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PRiTaM said...

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