Tuesday, 19 June, 2007

सबकी कब्र खोद द्‌यूंगा

ल्यो जी या दकान खोले तो मीन्ने होग्ये अर म्‌हूरत कर्‌या कोनी। इस्सै खातर आज दकान का म्‌हूरत कर्‌या सूं, देक्खां किसी बोणी होवै सै।

घुग्घू कब्र खोदण का काम कर्‌या करदा था। एक बर इसा होया अक गाम म्ह दो-तीन साल बरसात कोनी होई तो धरती करड़ी होग्यी अर घुग्घू नै कब्र खोददी हाण घणा जोर लगाणा पड़दा। एक दिन गाम म्ह खूब बरसात होई तो घुग्घू सरपंच धौरे गया अर बोल्या, सरपंच साब गाम म्ह रुक्का मरवा द्‌यो अक सारे गाम आले आकै अपणी कब्र का माप दे जावैं, इब धरती नरम होरी सै सबकी कब्र खोद द्‌यूंगा।

19 टिप्पणियाँ:

Pankaj Bengani said...

यो जबरो कर्यो रे मास्टर..

सबकी कब्र खोद के, कितरा तीर मार लेसी? पहले यो तो डिसायड कर कि कबर मायँ पेली कुण जासी?

गिरिराज जोशी said...

यो कै मास्टर?

नाप दै आय्यो कै? :)

RC Mishra said...

सही मौका है, सबकी खोद डालो :)

Sagar Chand Nahar said...

मजेदार चुटकुलो सै।
अर घुघ्घु पण जबरो सै।

संजय बेंगाणी said...

हा हा हा
म्हारी भी खुदवा दे.. पाँ फूट चार इंच री.. :)
लागै हिअ जल्दी ही जरूर पड़ सी

जगदीश भाटिया said...

हा हा , मजेदार :)

masijeevi said...

:)

अतुल शर्मा said...

:)

Sanjeet Tripathi said...

वधिया जी वधिया!!
पैले यो बता मास्टर्र के इत्ते दिनां बाद इधर का रास्ता कैसो भूल गयो!!
इधर ही ठिया बना ले रे भाया!

अरुण said...

रै सुण दो कै साथ ऐक फ़्री वालो बोर्ड बी इठै से ठा लेजा,काम आवेगा उठै

मोहिन्दर कुमार said...

भाई मन्ने यो बता इस कब्र खोदन में भी कोई टैकनिकल बात से के ?

Udan Tashtari said...

:) :)हा हा

notepad said...

:D

DR PRABHAT TANDON said...

ha ha ha ha ha ha ha ................

आशीष said...

हा हा हा हा हा

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

कोई मुहल्ले वाला हल्ला मचाता नहीं आया कि - ये कब्र खोदण की बात कर्रे स्ये. जळावण की कोन्नी. जरूर एक कौम के पिच्छे पड्या है!

Shrish said...

@Pankaj Bengani,
टैम की बात सै भाई या तो। जिसका टैम आवागा उन्नां जाणा ई पड़ागा।

@गिरिराज जोशी,
देणा ई पड़ागा भाई, के करां एक दिन सबना जाणा ई है।

@RC Mishra,
बिल्कुल खोद द्‌यांगे जी।

@Sagar Chand Nahar,
जी घुग्घू तो डेयरिंग पर्सन सै, सीधे मुखिया पै पोंचग्या।

@Sanjay Bengani,
ठीक सै जी घुग्घू तै माप भेजूँ सूँ।

@जगदीश भाटिया, मसिजीवी, अतुल शर्मा,
:)

@संजीत त्रिपाठी,
बस आवारा बंजारा सूं जी, आग्या भटकदा-भटकदा, बाकी सोचूं सूं यईं डेरा जमै ल्यूं। एक छोटे से मखौल पे १६ कमेंट इतणी खातर तो मन्नै बोत तकड़ा आर्टीकल लिखणा पड़ै सै, फेर बी गरंटी कोनी। :)

Shrish said...

@अरुण,
ही ही, या स्कीम भी लाग्गू करणी पड़ागी भाई। :)

@मोहिन्दर कुमार,
टैक्नीकल बात सै जी, फेर ही तो घुग्घू मौसम देखकै कबर खोदण शुरु कर र्‍या सै।

@उड़नतश्तरी, नोटपैड, प्रभात टंडन, आशीष,
शुक्रिया जी, न्यू ए मुस्कुरांदे र्‌हो। :)

@ज्ञानदत्त पांडे,
हाँ जी बात तो सही सै, इसके पीछै बी के बेरा नारद आलों का हाथ हो। :)

mayuri vora said...

read ल्यो जी या दकान खोले तो मीन्ने होग्ये अर म्‌हूरत कर्‌या कोनी। इस्सै खातर आज दकान का म्‌हूरत कर्‌या सूं, देक्खां किसी बोणी होवै सै।

घुग्घू कब्र खोदण का काम कर्‌या करदा था। एक बर इसा होया अक गाम म्ह दो-तीन साल बरसात कोनी होई तो धरती करड़ी होग्यी अर घुग्घू नै कब्र खोददी हाण घणा जोर लगाणा पड़दा। एक दिन गाम म्ह खूब बरसात होई तो घुग्घू सरपंच धौरे गया अर बोल्या, सरपंच साब गाम म्ह रुक्का मरवा द्‌यो अक सारे गाम आले आकै अपणी कब्र का माप दे जावैं, इब धरती नरम होरी सै सबकी कब्र खोद द्‌यूंगा।


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